इसमें मेरा प्यार मिला हुआ है..

real life love stories in hindi, emotional love story in hindi, love story in hindi heart touchingदिसंबर के महीने से लड़की को बेइन्तेहां प्यार था.वो दिसंबर को अक्सर ‘टेन्डर दिसंबर’ कहा करती थी.वो चाहती थी कि दिसंबर के महीने पर वो कोई फिल्म बनाये.उसने फिल्म का नाम भी सोच रखा था…’लव इन दिसंबर’…उसकी ज़िन्दगी के सबसे हसीन और उदास दिन दिसंबर के ही थे…तरह तरह के बेवकूफियों वाले कारनामे, नए नए शरारती एक्सपेरिमेंट उसने दिसंबर के दिनों में ही किये थे…वे दिसंबर के ही दिन थे जब लड़की ने खुल के जीना सीखा था.सुबह के ठण्ड में वो लड़के के साथ हर रोज़ कंप्यूटर क्लास जाती.
सुबह के घने कोहरे में सड़कों पर चलना और सड़कों के किनारे छोटी छोटी गुमटियों में चाय पीना उसके शौक थे.वो जब कभी सुबह का घना कोहरा देखती तो बहुत खुश हो जाती और अक्सर लड़के से कहती..”काश मैं इस कोहरे को मुट्ठी में पकड़ के अपने बैग में रख सकूँ और घर जाने पर इसे अपने टेबल पर सजा के रखूं और दिन भर इस कोहरे के साथ खेलूं..”.लड़का उसकी इस बात पर हँसता भी था और उसे चिढ़ता भी, लेकिन उसे कभी कोई फर्क नहीं पड़ता.
दिन भर वो दोनों शहर के एक कोने से दुसरे कोने बेवजह घूमते रहते और शाम में कोचिंग क्लास के बाद वे पार्क में जाकर बैठते.वहां वो दोनों दुनिया भर की बातें करते…कभी कभी वो दोनों अपनी अपनी ख्वाहिशें भी एक दुसरे को बताते.लड़की हमेशा अपने पास एक नोटबुक रखती…वो उस नोटबुक को बहुत सजा के रखा करती थी…दुनिया भर के स्टिकर्स, लैस, गोटे और सितारों से वो अपने नोटबुक को सजाय रखती…लड़के को उस नोटबुक में लिखी कोई भी बात समझ नहीं आती थी, लेकिन फिर भी जब कभी लड़की उस नोटबुक में लिखी बातें पढ़कर लड़के को सुनाती, वो सिर हिला कर बात को अच्छी तरह समझ जाने का नाटक करता.
उस नोटबुक में लड़की ने एक अलग सेक्सन बना रखा था जिसमे वो अपनी ख्वाहिशें लिखती जाती…उसकी ख्वाहिशों की लिस्ट बड़ी लम्बी चौड़ी और विएर्ड सी थी और हर दुसरे तीसरे दिन वो लिस्ट अपडेट होते रहती.एक दिन लड़की ने अपने उस नोटबुक में एक नया सेक्सन बनाया जिसमे वो लड़के की ख्वाहिशें लिखना चाहती थी.उसे बड़ी हैरानी हुई जब आठवीं ख्वाहिश पर आकर लड़के ने कहा “बस, इससे ज्यादा और कुछ नहीं”.
“छि…आठ ख्वाहिश….तुम पागल हो क्या…इतनी कम भी क्या ख्वाहिशें होती हैं….और वो भी इतने मामूली…नहीं, तुम मेरे दोस्त नहीं हो सकते….मेरी लिस्ट देख लो….डबल सेंचुरी के करीब है, और तुम बस आठ पर ही अटक गए….तुम शायरी वायरी पढ़ते रहते हो…मुझसे नहीं तो कम से कम हजारों ख्वाहिशें ऐसी वाली शायरी से तो इंस्पायर्ड हो….”.लड़के ने उसे समझाने की कोई भी कोशिश नहीं की, बल्कि उसे देख मुस्कुराने लगा..
कुछ देर कुछ सोचकर लड़की ने पूछा “अच्छा, मैं अपनी ख्वाहिशों वाले सेक्सन से कुछ तुम्हारे ख्वाहिशों वाले सेक्सन में कॉपी कर दूँ?देखो..मैं हमेशा भगवान् जी से प्रार्थना करती हूँ की वो इस डायरी में लिखी हर विश को पूरा कर दें..मान लो अगर उनको दया आ गयी और उन्होंने हमारे दस पंद्रह विशेज भी अगर पुरे कर दिए…और वो भी हमारे कॉमन वाले विशेज…तो सोचा ज़रा….कितना अच्छा होगा न?

लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा, “जो तुम्हे अच्छा लगे करो…”.लड़की बेहद खुश हो गयी और जल्दी जल्दी अपनी कुछ ख्वाहिशें लड़के के विशेज वाली सेक्सन में कॉपी करने लगी….

इस तरह की बहकी बहकी हरकतें और बातें करना लड़की के लिए नया नहीं था…एक दिन पार्क में वो चुपके से लड़के के पास आई और बड़े प्यार से लड़के के कानों में कहा “ज़रा इधर तो देखो…तुम्हारे लिए मैं चोकलेट लायी हूँ….इसमें मेरा प्यार मिला हुआ है”.लड़का आँखें फाड़ फाड़ कर उसे घूरने लगा…उसने लड़की की हर तरह की अजीब और बहकी बहकी हरकतें झेली थी, लेकिन अभी जो उसने किया उसका तो लेवल ही कुछ अलग सा था.

“आज पूरी तरह पागल हो गयी क्या?”..लड़के ने बड़े अजीब तरह से लड़की को घूरते हुए सवाल किया….लड़की थोड़ा सहम सी गयी और उसने बड़े मासूमियत से जवाब दिया

“अरे…एक फिल्म मैं देख रही थी..उसमे हीरोइन हीरो से कहती है -मैं तुम्हारे लिए रोटी लायी हूँ, इसमें मेरा प्यार मिला हुआ है..मुझे ये लाईन बड़ा अच्छा लगा, और कब से सोच रही थी की इसे कहाँ यूज करूँ, तो तुम्हारा ख्याल आया और देखो मैंने कितने अच्छे से यूज कर दिया…और तुमने मुझे बेवजह ही इस तरह से डांट कर डरा दिया.”लड़की की इस बात पर लड़के को बड़े जोर से हंसी आई, लेकिन उसने बड़ी मुस्किल से अपने हंसी पर काबू किया..और फिर उसने सवाल किया…”

ये बताओ इसे तो तुमने बाज़ार से खरीद कर लाया है, खुद से तो बनाया नहीं…तो इसपर कैसे वो फिल्म का डायलोग फिट बैठेगा?”.लड़की चुप हो गयी…वो कुछ सोचने लगी….और जब कुछ देर तक उसे कोई सही जवाब नहीं सुझा तो मायूस हो गयी…और बड़े उदास सी आवाज़ में उसने धीरे से कहा “तो क्या…मैंने ये चोकलेट नहीं बनाया लेकिन लेकर तो मैं आई हूँ न……उतने देर ये मेरे पास रहा…मेरे हाथ से टच होता रहा….मेरे बैग में भी पड़ा रहा…मेरे रूम के टेबल पर पड़ा रहा…कुछ न कुछ तो मेरा प्यार इसमें ट्रांसफर हो ही गया होगा न…कम से कम १% तो जरूर ही ट्रांसफर हुआ होगा और तुम बस हमेशा मेरा मजाक उड़ाते रहते हो”.

लड़की लड़के से बहुत नाराज़ हो गयी थी, इतना की उसने वो चोकलेट लड़के से छीन कर वापस अपने बैग में रख लिया.लड़की को मनाने के लिए लड़के को बहुत मेहनत करनी पड़ी…दुसरे दिन भी लड़की ने लड़के से ठीक से बात नहीं की, तब लड़के ने अपने पसंदीदा शायर की एक नज़्म लड़की को लिख भेजी, और लड़की ने समझा की वो नज़्म लड़के ने खुद लिखी है..और फिर अगली सुबह क्लास के बाद लड़की खुद लड़के के पास आई और आकर उसने कहा…”तुमने जो कल मुझे ये नज़्म लिख कर दी थी, उसे अभी खुद पढ़ के सुनाओ और मुझे चाय पिलाओ…तब तुम्हे माफ़ी मिलेगी”.

लड़के ने वैसा ही किया.लड़की ने लड़के को माफ़ तो कर दिया और दोनों फिर से एक साथ घुमने भी लगे लेकिन उस दिन के बाद कई दिनों तक लड़की ने लड़के को एक भी चोकलेट नहीं दिया…हाँ, लड़के को दिखा कर ललचा कर खाती जरूर रही लेकिन चोकलेट का एक बाईट भी लड़के को लेने नहीं दिया.

मुझको इतने से काम पे रख लो

जब भी सीने में झूलता लॉकेट
उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
सीधा करता रहूँ उसकोजब भी आवेज़ा उलझे बालों में
मुस्कुराके बस इतना सा कह दो
‘आह, चुभता है ये अलग कर दो’जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
या दुपट्टा किवाड़ में अटके
इक नज़र देख लो तो काफ़ी है’प्लीज़’ कह दो तो अच्छा है
लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरामुझको इतने से काम पे रख लो

[ गुलज़ार ]
Abhihttps://www.abhiwebcafe.com
इस असाधारण सी दुनिया में एक बेहद साधारण सा व्यक्ति हूँ. बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पूरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं! पेशे से वेब और कंटेंट डेवलपर, और ऑनलाइन मार्केटर हूँ. प्यारी मीठी कहानियाँ लिखना शौक है.

11 COMMENTS

  1. यार अभिशेक ये तुम्हारा दिसम्बर जनुअरी में भी बहुत सुहाना लग रहा है. और उसपर से ये गुलज़ार वाली बात तो सितम है यारा ……….
    जैसे मानो किसी और ही दुनिया में हो जहाँ कोई और परेशानी की वजह न हो. बस एक ही ख्वाब हो और हम उसी में अपने आप को ढूंढते फिरे

  2. जब आई.एस-सी. में पढता था तब भी लिटरेचर की क्लास बहुत ईमानदारी से अटेंड करता था.. उन्हीं दिनों एक प्रोफ़ेसर से इश्क हो गया था.. उन्होंने एक कविता इतने खूबसूरत अन्दाज़ में पढाई कि बस पढाने वाले पर रीझ गया मैं.. कविता थी अल्फ्रेड टेनिसन की "द मिल्लर्स डॉटर".. इसके कुछ साल बाद गुलज़ार साहब की ये नज़्म पढ़ी.. बिलकुल वही थीम.. आज तक इस नज़्म को नहीं भूला मैं और न उस पोएट्री को!!
    तुमने भी क्या क्या याद दिला दिया! याद नहीं कब पढ़ी थी वो पोएट्री.. शायद दिसंबर ही रहा हो!!

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